
सासाराम: बिहार की राजनीति में इन दिनों एक अनोखी कहानी सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा में है। नीतीश कुमार की नई कैबिनेट में शामिल हुए दीपक प्रकाश, जो अभी कुछ दिन पहले तक सासाराम विधानसभा में एक निर्दलीय प्रत्याशी रामायण पासवान के मतगणना एजेंट के रूप में आरओ टेबल पर बैठे थे, अब पंचायती राज मंत्री बन चुके हैं। जिस उम्मीदवार को बेबी वॉकर का चुनाव चिन्ह मिला था और जिन्हें कुल 327 वोट मिले, उनके मतगणना एजेंट रह चुके दीपक प्रकाश का मंत्री पद तक पहुंचना लोगों को हैरान कर रहा है।
मतगणना वाले दिन का उनका आईडी कार्ड अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है और यह पूरा मामला नीतीश कुमार सरकार की नई कैबिनेट में सबसे अनोखी कहानी बन गया है।
Cabinet Secretariat Department – Government of Bihar
नीतीश कुमार कैबिनेट में दीपक प्रकाश की एंट्री से लोगों में खुसुर-फुसुर शुरू
मंत्री बनने के बाद जब दीपक प्रकाश का मतगणना एजेंट वाला आईडी कार्ड वायरल हुआ, राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। दिलचस्प बात यह है कि जिस दिन वे निर्दलीय उम्मीदवार के एजेंट के रूप में टेबल पर बैठे थे, उसी दिन उनकी मां स्नेहलता कुशवाहा इसी सीट से चुनाव लड़ रही थीं। चुनाव प्रचार के दौरान वे हर वक्त मां के साथ नजर आए, लेकिन मतगणना के दिन वे उनके एजेंट नहीं बने।
सोशल मीडिया पर लोग इसकी अलग-अलग व्याख्या कर रहे हैं — कुछ इसे राजनीतिक रणनीति बता रहे हैं, कुछ इसे किस्मत का खेल, तो कुछ इसे बिहार की राजनीति की अनोखी हकीकत। आईडी कार्ड के वायरल होते ही इस कहानी ने तेज़ी से तूल पकड़ा और लोग इसे “अंदर की राजनीति का खेल” कहकर चर्चा कर रहे हैं।
पोलिंग एजेंट से मंत्रालय तक – एक फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी कहानी
इस पूरे मामले में एनसीपी नेता आशुतोष सिंह ने भी फेसबुक पर आईडी कार्ड शेयर करते हुए लिखा कि उपेंद्र कुशवाहा लोकसभा चुनाव हार गए लेकिन राज्यसभा पहुंच गए, और अब उनके बेटे दीपक प्रकाश मंत्री बन गए। उनके पोस्ट पर लोगों ने तरह-तरह की टिप्पणियाँ कीं। किसी ने लिखा “किस्मत हो तो ऐसी,” तो एक यूजर ने सवाल उठाया कि आखिर एक निर्दलीय प्रत्याशी का अभिकर्ता बनने के पीछे क्या कारण रहा होगा।
22 प्रत्याशियों वाले इस चुनाव में एक ऐसे उम्मीदवार के एजेंट की तरह अंदर बैठना, जिसकी जमानत भी जब्त हुई, और फिर कुछ ही दिनों बाद मंत्री पद मिल जाना, लोगों को यह पूरी कहानी किसी फिल्म की स्क्रिप्ट जैसी लग रही है।

नीतीश कुमार कैबिनेट – कभी पोलिंग एजेंट, आज मंत्री; किस्मत का खेल निराला”