
झंझारपुर से गौतम झा की रिपोर्टबिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग के तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय भामती वाचस्पति महोत्सव का गुरुवार को अंधराठाढ़ी प्रखंड के ठाढ़ी गांव स्थित फूलदेवी कुशेश्वर झा कॉलेज परिसर में भव्य समापन हुआ। यह महोत्सव मिथिला की सांस्कृतिक, राजनीतिक और आर्थिक विरासत को नया आयाम देने वाला साबित हुआ। दूसरे दिन के कार्यक्रम में चार सत्र आयोजित किए गए, जिनमें विभिन्न विषयों पर गहन चर्चा और सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं।
अंधराठाढ़ी में दूसरे दिन के कार्यक्रम में चार सत्र किए गए आयोजित
प्रथम सत्र में मैथिली एवं संस्कृत के अंतर्संबंध पर चर्चा हुई। इस सत्र में प्रो. फुलचंद्र मिश्र, प्रो. दयानाथ झा और योगानंद झा ने मैथिली और संस्कृत भाषाओं के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कैसे ये दोनों भाषाएँ मिथिला की सांस्कृतिक पहचान को समृद्ध करती हैं।
द्वितीय सत्र में आर्थिक विकास पर चर्चा हुई। इस सत्र में डॉ. मनीष कुमार झा, प्रो. दिवाकर झा, शंकर देव झा और रत्नेश्वर झा ने मिथिला क्षेत्र के आर्थिक विकास की संभावनाओं और चुनौतियों पर अपने विचार रखे। उन्होंने क्षेत्र में रोजगार के अवसर, उद्योगों की स्थापना और कृषि के आधुनिकीकरण पर जोर दिया।
तृतीय सत्र में कवि सम्मेलन का आयोजन हुआ। इस सत्र में बैद्यनाथ मिश्र, शशिकांत झा, अमलेश मिश्र, हरिश्चंद्र झा, चंद्रमोहन झा, डॉ. संजीत झा, सरोज ठाकुर, प्रजापति ठाकुर, देवानंद मिश्र, चंद्रशेखर, फुलचंद्र झा और संबोध मिश्र ने अपनी काव्य रचनाएँ प्रस्तुत कीं। उनकी रचनाओं ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
चतुर्थ सत्र में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस सत्र में विनोद ग्वार, जूली झा, प्रिंस झा और अनिता भट्ट ने मैथिली लोकगीतों और संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं। उनके गीतों पर श्रोता झूमते नजर आए।
कार्यक्रम में बीपीआरओ रोहित विक्रांत, सीओ प्रियदर्शिनी, सचिव काशीनाथ झा और अध्यक्ष रत्नेश्वर झा मौजूद रहे। थानाध्यक्ष राहुल कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने विधि-व्यवस्था बनाए रखी। इस महोत्सव ने मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करने के साथ-साथ क्षेत्र के विकास पर भी प्रकाश डाला।


