
आज, 20 जनवरी 2025 को, Patna में 85वें अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। इस दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने किया। सम्मेलन का मुख्य विषय "संविधान की 75वीं वर्षगांठ: संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में संसद और राज्य विधायी निकायों का योगदान" है।यह तीसरी बार है जब बिहार इस महत्वपूर्ण सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इससे पहले 1982 में यह सम्मेलन Patna में आयोजित हुआ था, जब कांग्रेस नेता राधानंदन झा विधानसभा अध्यक्ष थे।
इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, बिहार सरकार के संसदीय कार्य मंत्री श्री विजय कुमार चौधरी, बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव, बिहार विधानसभा के अध्यक्ष नंद किशोर यादव, बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव सहित विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी, बिहार सरकार के मंत्री, बिहार विधानमंडल के सदस्य और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
Patna में आयोजित अखिल भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन की झलकियां
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की उपस्थिति में, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला सम्मेलन का उद्घाटन करेंगे। इस अवसर पर राज्यसभा के उपसभापति श्री हरिवंश, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा, संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी, विधानसभा अध्यक्ष नंद किशोर यादव, विपक्ष के नेता तेजस्वी प्रसाद यादव सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहेंगे।
“संविधान की 75वीं वर्षगांठ: संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करने में संसद और राज्य विधायी निकायों का योगदान” पर विस्तृत चर्चा की जाएगी।
देशभर के 28 राज्यों के विधानसभा अध्यक्ष, 6 विधान परिषदों के सभापति, केंद्र शासित प्रदेशों के स्पीकर सहित कुल 56 विधानमंडलों के पीठासीन अधिकारी इस सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
21 जनवरी 2025 को बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला समापन सत्र को संबोधित करेंगे।
सम्मेलन के दौरान, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ‘संसद की कार्यप्रणाली एवं प्रक्रिया’ के 8वें संस्करण का विमोचन करेंगे। इसके अतिरिक्त, 19 जनवरी 2025 को भारत के विधानमंडलों के सचिवों का 61वां सम्मेलन भी पटना में आयोजित किया गया, जिसमें विधायी संस्थानों की कार्यक्षमता और उत्पादकता बढ़ाने पर चर्चा हुई। इस सम्मेलन के माध्यम से संसद और राज्य विधानसभाओं के बीच समन्वय और सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाएंगे।