
पटना: बिहार में एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। सुपौल जिले के गौसपुर गांव का 21 वर्षीय हर्षित कुमार चीन जाकर साइबर क्राइम की ट्रेनिंग लेकर लौटा था और यहां बैठकर सिम-बॉक्स के जरिए हजारों कॉल को भारत का नंबर बनाकर ठगी का नेटवर्क चला रहा था। आर्थिक अपराध इकाई (EoU) की टीम ने उसके ठिकाने से 231 नई सिम, करीब 800 इस्तेमाल की सिम और आठ हाई-टेक सिम-बॉक्स बरामद किए हैं। कमरे में लगी मशीनों और लगातार चल रही कॉल रूटिंग देखकर जांच अधिकारी भी हैरान रह गए।
Economic Offences Unit, Bihar (EOU बिहार)
चीन से तकनीक सीखकर बनाया ठगी का जाल
जांच में सामने आया कि हर्षित सोशल मीडिया के जरिए चीन और वियतनाम के हैकर ग्रुप्स के संपर्क में आया था। वहीं से उसे यह तकनीक सिखाई गई कि कैसे किसी विदेशी नंबर को भारत का लोकल नंबर बनाकर कॉल किया जाए। इसी दौरान उसे वियतनाम और चीन से आठ सिम-बॉक्स भेजे गए।
इन सिम-बॉक्स में एक साथ 32–64 सिम कार्ड लग जाते हैं और ये मशीनें हजारों कॉल को बिना पकड़े रूट कर सकती हैं। पुलिस ने जब डेटा खंगाला तो पता चला कि 30 जून से 2 जुलाई 2025 के बीच हर्षित के एक सेटअप से 48 घंटे में 51,000 कॉल्स की गई थीं। ज्यादातर कॉल्स बैंक KYC, बीमा, लोन और OTP से जुड़े स्कैम के लिए इस्तेमाल होती थीं।
National Cyber Crime Reporting Portal (Cyber Portal)
साइबर फ्रॉड में सिम-बॉक्स का इस्तेमाल, विदेशी कॉल भारतीय नंबर बनकर पहुंचती थी लोगों तक
EoU अधिकारियों के मुताबिक हर्षित का कमरा किसी छोटे टेलीकॉम कंट्रोल रूम जैसा बन चुका था। हर जगह सिम कार्ड, राउटर, वायरिंग और मोबाइल फोन पड़े थे। कई मशीनें लगातार चालू थीं और कॉल रूटिंग चल रही थी।
नेपाल, बांग्लादेश, वियतनाम और थाईलैंड जैसी जगहों से आने वाली कॉल्स को वह सिम-बॉक्स के जरिए इस तरह मॉडिफाई करता था कि रिसीव करने वाले व्यक्ति के मोबाइल पर बिहार, दिल्ली या किसी भी भारतीय शहर का नंबर दिखाई देता था।
यही वजह थी कि लोग कॉल पर भरोसा कर लेते थे और आसानी से अपनी बैंकिंग जानकारी साझा कर बैठते थे।
पुलिस का मानना है कि इतने बड़े स्तर पर यह काम अकेला नहीं हो सकता, और इसके पीछे एक संगठित गिरोह की भूमिका साफ नजर आती है।
मामला गंभीर, EoU ने CBI से जांच की सिफारिश भेजी; नेटवर्क कई राज्यों में फैला होने का शक
विदेशी कनेक्शन और बड़े पैमाने पर कॉल रूटिंग को देखते हुए EoU ने इस मामले की जांच CBI से कराने का अनुरोध किया है। अधिकारी मानते हैं कि यह रैकेट सिर्फ सुपौल तक सीमित नहीं है बल्कि कई राज्यों में फैले नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है।
हर्षित के डिजिटल डिवाइस, चैट और ट्रांजैक्शन की फॉरेंसिक जांच से कई और नाम सामने आने की संभावना है। पुलिस का कहना है कि यह हाई-टेक साइबर फ्रॉड बिहार में डिजिटल सुरक्षा की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बनकर सामने आया है।


