
जनगणना 2027: जनगणना 2027 इस बार सिर्फ आंकड़ों का दस्तावेज नहीं, बल्कि बदलते भारतीय समाज की असली तस्वीर बनने जा रही है। केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े, यदि वे एक-दूसरे को स्थायी साथी मानते हैं, तो जनगणना में उन्हें ‘विवाहित दंपत्ति’ की श्रेणी में ही दर्ज किया जाएगा।
जनगणना 2027 में लिव-इन रिलेशनशिप को मिली आधिकारिक पहचान
सरकारी पोर्टल पर जारी नई गाइडलाइंस के मुताबिक जनगणना का उद्देश्य समाज की वास्तविक तस्वीर को दर्ज करना है, न कि किसी के निजी जीवन पर कोई नैतिक टिप्पणी करना। यह निर्णय उन लाखों युवाओं और जोड़ों के लिए बड़ी राहत है जो पारंपरिक विवाह के बंधन से इतर अपनी गृहस्थी बसा चुके हैं।
डेटा सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने नागरिकों को आश्वस्त किया है। जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायणन ने स्पष्ट किया कि जनगणना अधिनियम की धारा 15 के तहत व्यक्तिगत डेटा पूरी तरह सुरक्षित रहेगा। यह जानकारी RTI के दायरे में नहीं आएगी, अदालतें इसे साक्ष्य के रूप में इस्तेमाल नहीं कर पाएंगी और किसी सरकारी योजना के लाभ या कटौती का आधार भी नहीं बनेगी।
Census 2027 पहली बार पूरी तरह डिजिटल, दस्तावेज की कोई जरूरत नहीं
2027 की जनगणना में पहली बार पूरा डेटा संग्रह मोबाइल ऐप के जरिए होगा, जिससे प्रक्रिया तेज, सटीक और पारदर्शी बनेगी। घर आए गणना अधिकारी नागरिकों से आधार, पैन या कोई अन्य दस्तावेज नहीं मांगेंगे, जिससे आम लोगों के लिए यह प्रक्रिया काफी सुविधाजनक हो जाएगी।
- पहला चरण – हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग: 1 अप्रैल से शुरू, घरों की स्थिति और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी ली जाएगी।
- दूसरा चरण जनसंख्या गणना: आबादी से जुड़े विस्तृत आंकड़े जुटाए जाएंगे।
- डिजिटल प्रक्रिया से परिणाम जल्द घोषित होंगे, सालों का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
कुल मिलाकर Census 2027 न सिर्फ तकनीकी रूप से एक नए युग की शुरुआत है, बल्कि सामाजिक बदलावों को आधिकारिक दर्जा देने की दिशा में भी एक अहम कदम है।
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