
घोघरडीहा प्रखंड के हटनी गांव निवासी और इलाके के विख्यात कथावाचक जानकीनन्दन मिश्र का मंगलवार को उनके पैतृक निवास स्थान पर निधन हो गया। 87 वर्षीय जानकीनन्दन मिश्र संस्कृत उच्च विद्यालय, रहुआ से सेवानिवृत्त शिक्षक थे और अपनी विद्वता तथा कथा वाचन की कला के लिए पूरे क्षेत्र में जाने जाते थे। वे अपने पीछे पत्नी, चार पुत्र, और एक पुत्री सहित एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं।उनका अंतिम संस्कार बुधवार को पारिवारिक परंपराओं के अनुसार संपन्न हुआ। इस दौरान उनके ज्येष्ठ पुत्र अनिल कुमार मिश्र ने मुखाग्नि दी। उनके निधन से घोघरडीहा प्रखंड में गहरी शोक की लहर है। जानकीनन्दन मिश्र न केवल एक प्रतिष्ठित शिक्षक थे, बल्कि धार्मिक आयोजनों के लिए प्रेरणा स्रोत भी थे। उनकी कथाओं में गहरी आध्यात्मिकता और सामाजिक संदेश होता था, जिसे सुनने के लिए सैकड़ों की भीड़ उमड़ती थी।
घोघरडीहा में शोक की लहर
घोघरडीहा के इस महान व्यक्तित्व के निधन पर स्थानीय नेताओं, शिक्षाविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक व्यक्त किया। पूर्व मुखिया राकेश मिश्रा, भगवान झा, निरंजन झा, घनश्याम मिश्र, ज्योतिषाचार्य गोपीकृष्ण झा, पंडित मोहन झा, और गोपाल झा ने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की और परिवार को इस कठिन समय में धैर्य बनाए रखने की कामना की।
शोक संदेशों में उनके योगदान को याद करते हुए कहा गया कि जानकीनन्दन मिश्र जैसे व्यक्तित्व का जाना न केवल परिवार के लिए बल्कि पूरे घोघरडीहा क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी कथावाचन की कला ने लोगों को आध्यात्मिकता से जोड़ा और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाई।
जानकीनन्दन मिश्र न केवल धार्मिक कार्यों में सक्रिय थे, बल्कि उन्होंने घोघरडीहा और आसपास के क्षेत्रों में शिक्षा और सामाजिक कार्यों में भी अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने अपने छात्रों और स्थानीय लोगों के बीच नैतिक मूल्यों और धार्मिक परंपराओं को बढ़ावा दिया। उनका सरल स्वभाव और गहरी विद्वता उन्हें हर उम्र के लोगों के बीच लोकप्रिय बनाते थे।
उनके निधन से घोघरडीहा और आसपास के इलाकों में शोक का माहौल है। उनके जीवन और योगदान को क्षेत्रवासी लंबे समय तक याद करेंगे।