Ghoghardiha प्रखंड मुख्यालय स्थित नारायण उत्सव विवाह भवन में रविवार को एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का आयोजन मतदाता अधिकार मोर्चा जिला मधुबनी के तत्वावधान में किया गया था। यह सभा विशेष रूप से आर्थिक आज़ादी के प्रखंड सेनानी सुबेदार स्व॰ नरेन्द मंडल एवं स्व॰ फेकन मंडल की प्रथम पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए आयोजित की गई। इस अवसर पर समारोह का उद्घाटन पूर्व प्राचार्य अरुण कामत, रामस्वरूप भारती, रामप्रवेश प्रसाद, उपेन्द्र सिंह, अरविंद मिश्र, गणेश प्रसाद मंडल और हरिहर नाथ झा द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।

Ghoghardiha में सुबेदार स्व॰ नरेन्द मंडल और स्व॰ फेकन मंडल के योगदान को याद किया गया
Ghoghardiha में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई और वक्ताओं ने मतदाता के अधिकारों के महत्व पर जोर दिया। इस दौरान वक्ताओं ने कहा कि जब तक वोटरों को वोटर पेंशन नहीं मिलेगा, तब तक भारतीय लोकतंत्र में असली आज़ादी का सवाल कायम रहेगा।
मुख्य अतिथि गणेश प्रसाद मंडल ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत को उसके संपत्ति और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) से जो भी आय होती है, उसका आधा हिस्सा वोटरों के लिए वोटर पेंशन के रूप में दिया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि प्रत्येक मतदाता को कम से कम 8500 रुपये की नगद राशि मिलने चाहिए, ताकि लोकतंत्र को सशक्त और आर्थिक रूप से मजबूत किया जा सके।
Ghoghardiha में आयोजित कार्यक्रम वोटर पेंशन के महत्व पर जोर
Ghoghardiha में आयोजित सभा में वार्ड पार्षद फुल कुमारी, महेंद्र प्रसाद, चौधरी, धुरन यादव, ई बोएलाल मंडल, बेचन मंडल, गणेश प्रसाद यादव समेत कई गणमान्य व्यक्तियों ने अपनी राय व्यक्त की। सभी ने एक स्वर में वोटर पेंशन की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि यदि हर मतदाता को वोटर पेंशन मिलती है, तो यह भारतीय लोकतंत्र को और मजबूत बनाएगा और नागरिकों को एक नई आर्थिक स्वतंत्रता मिलेगी। इस प्रकार का कदम ना केवल वोटिंग प्रक्रिया को प्रोत्साहित करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि प्रत्येक नागरिक को उनके मताधिकार के बदले उचित लाभ मिले।
इस आयोजन के माध्यम से यह संदेश भी दिया गया कि लोकतंत्र में नागरिकों का सक्रिय योगदान महत्वपूर्ण है। अगर हम चाहते हैं कि हर भारतीय नागरिक का जीवन बेहतर हो, तो हमें न केवल आर्थिक आज़ादी देनी होगी, बल्कि उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का सम्मान भी करना होगा। जब तक वोटरों को उनके अधिकारों का सम्मान नहीं मिलेगा, तब तक लोकतंत्र की वास्तविकता अधूरी रहेगी।