घोघरडीहा थाना क्षेत्र के हरिनाही गांव में जमीन विवाद ने एक बार फिर गंभीर रूप ले लिया है। 20 नवंबर को विवादित जमीन पर हुई झड़प में प्रशासनिक लापरवाही और न्यायालय के आदेश की अनदेखी की घटनाओं ने इस विवाद को और उग्र बना दिया। झंझारपुर न्यायालय द्वारा विवादित जमीन पर रोक लगाने के आदेश के बावजूद स्थिति नियंत्रित नहीं हो सकी जिससे दोनों पक्षों के बीच हिंसक टकराव हो गया।जमीन विवाद में वादी और विपक्ष के आरोप
माननीय झंझारपुर न्यायालय के आदेश का घोघरडीहा थाना पुलिस द्वारा कथित रूप से अनुपालन न करने का एक गंभीर मामला सामने आया है। यह घटना घोघरडीहा थाना क्षेत्र के हरिनाही गांव की है, जहां न्यायालय के आदेश की अनदेखी के कारण जमीन विवाद ने हिंसक रूप ले लिया।वादी योगेंद्र मंडल ने घोघरडीहा थाने में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि विवादित जमीन पर जब वे अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष के साथ खड़े थे, तभी विपक्षी पक्ष के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। उन्होंने घटना में 17 लोगों को नामजद किया है और कहा कि सीओ और थानाध्यक्ष की उपस्थिति के बावजूद वे सुरक्षित नहीं रह सके। वहीं, विपक्षी पक्ष के जगरनाथ मंडल ने भी प्राथमिकी दर्ज कराई है। उनका कहना है कि वादी पक्ष ने उनके साथ मारपीट और छिनतई की है, जिसमें उन्होंने छह लोगों को आरोपी बताया है।

जमीन विवाद में न्यायालय के आदेश का अवमामना और प्रशासनिक लापरवाही
हरिनाही गांव में जमीन का यह विवाद झंझारपुर न्यायालय में पहले से चल रहा है। टाइटल संख्या 23/23 के तहत न्यायालय ने 20 अगस्त 2024 को इस जमीन पर अस्थायी रोक (इंजक्शन) लगाते हुए अंचलाधिकारी (सीओ) और थानाध्यक्ष को निर्देश दिया था कि वे आदेश का पालन सुनिश्चित करें। इसके बावजूद, प्रशासन द्वारा इस आदेश को समय पर लागू नहीं किया गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ता गया।
घटना के दिन अंचलाधिकारी शंशाक सौरभ और थानाध्यक्ष सर्वेश कुमार झा विवादित जमीन पर पहुंचे थे। वादी योगेंद्र मंडल ने बताया कि उन्होंने अधिकारियों को जमीन के कागजात दिखाए थे, लेकिन प्रशासन की मौजूदगी के बावजूद दूसरे पक्ष ने हमला कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति में इस तरह की घटना होना गंभीर लापरवाही का संकेत है।
इस मामले को लेकर प्रशासन पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। न्यायालय के आदेश के बावजूद जमीन विवाद पर सही कार्रवाई नहीं की गई। सीओ और थानाध्यक्ष की मौजूदगी में हुई झड़प प्रशासन की तैयारी और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है। इस मामले में एसडीओ फुलपरास ने भी थानाध्यक्ष और अंचलाधिकारी को निर्देश दिया था कि न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करें और विधिसम्मत कार्रवाई करें।
घटना के बाद दोनों पक्षों द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी में अलग-अलग आरोप लगाए गए हैं। वादी पक्ष ने 17 लोगों को नामजद करते हुए आरोप लगाया कि उनके साथ मारपीट की गई और घायल कर दिया गया। वहीं, विपक्षी पक्ष ने छह लोगों पर मारपीट और छिनतई का आरोप लगाया है।