घोघरडीहा: कनिष्का इंटरनेशनल स्कूल घोघरडीहा द्वारा आयोजित एक दिवसीय शैक्षणिक भ्रमण राजनगर में उत्साह और ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शिक्षकों की टीम के साथ मिथिला की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को पहली बार इतने करीब से देखा, समझा और अनुभव किया।

कनिष्का इंटरनेशनल स्कूल घोघरडीहा के छात्र-छात्राओं को वास्तुकला की बारीकियों को समझने का मिला अनोखा मौका
राज परिसर का अवलोकन करते हुए कनिष्का इंटरनेशनल स्कूल घोघरडीहा के विद्यार्थियों ने भवन निर्माण, डिज़ाइन और पारंपरिक संरचना के उन पहलुओं को जाना जिन्हें वे अब तक केवल पुस्तकों में पढ़ते आए थे। शिक्षकों ने उन्हें समझाया कि जैसे ताजमहल में करीब 15 प्रमुख वास्तु तत्व मौजूद हैं, ठीक उसी तरह राज परिसर की भव्यता 22 विशिष्ट स्थापत्य घटकों पर आधारित है।
छात्रों ने मेहराबों और स्तंभों की शैली, जालीदार खिड़कियों की कलात्मकता, गुंबदों का संतुलन और आंतरिक प्रांगण की वैज्ञानिक संरचना को प्रत्यक्ष रूप से देखते हुए जाना कि वास्तुकला केवल पत्थर या ईंट का खेल नहीं, बल्कि कला, विज्ञान, इतिहास और संस्कृति का सुंदर संगम है। इस अनुभव ने कई छात्रों में वास्तुकला और पुरातत्व के प्रति नई रुचि जागृत की।
राजनगर के ऐतिहासिक परिसर का विस्तृत उल्लेख
राज परिसर के पास स्थित ऐतिहासिक मंदिर और धार्मिक संरचनाओं ने भी खींचा छात्र-छात्राओं का ध्यान
राज परिसर के पास स्थित ऐतिहासिक मंदिर/मदिर संरचनाओं का भी छात्रों ने अवलोकन किया। प्राचीन मूर्तिकला, पुराने समय की निर्माण तकनीक और दीवारों पर उकेरी गई कलात्मक रेखांकन ने उन्हें यह महसूस कराया कि पूर्वजों का शिल्प आज भी आधुनिक इंजीनियरिंग को चुनौती देता है। कई बच्चों ने पहली बार जाना कि कई सदियों पुरानी इमारतें आज भी वैसी ही मजबूती से खड़ी हैं जैसा उन्हें बनाया गया था।
भ्रमण के दौरान छात्रों के लिए लाइव ऑब्जेक्ट पेंटिंग, नृत्य प्रतियोगिता और क्विज़ जैसे रोचक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। पेंटिंग में बच्चों ने राज परिसर की सुंदर झलकियों को कैनवास पर उतारा। वहीं क्विज़ ने उनकी संस्कृति, इतिहास और वास्तुकला से जुड़ी समझ को गहरा किया। इन गतिविधियों ने भ्रमण को और भी जीवंत और यादगार बना दिया।
राज परिसर ,राजनगर से जुड़ी सांस्कृतिक जानकारी
कनिष्का इंटरनेशनल स्कूल घोघरडीहा के विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि ऐसे शैक्षणिक भ्रमण बच्चों को वास्तविक दुनिया से जोड़ते हैं। जानकारी केवल किताबों से आगे बढ़कर आंखों के सामने सजीव रूप में आती है, जिससे सीखना आसान और रोचक हो जाता है। छात्रों ने भी इसे अपने जीवन का यादगार अनुभव बताया और अनेक विद्यार्थियों ने आगे इतिहास, वास्तुकला और सांस्कृतिक अध्ययन में गहरी रुचि व्यक्त की।
इस सफल कार्यक्रम में कनिष्का इंटरनेशनल स्कूल घोघरडीहा के शिक्षक-शिक्षिकाओं और पूरे स्टाफ की भूमिका सराहनीय रही।


