
फुलपरास: फुलपरास अनुमंडल के ललमनियां में इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली एक वारदात ने न सिर्फ समाज को झकझोर दिया है, बल्कि पुलिस की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जमीन विवाद में एक महादलित महिला के साथ कथित बर्बरता-मारपीट, खंभे से बांधकर अपमान और जातिसूचक गालियां जैसी घटनाओं ने पूरे इलाके को हिलाकर रख दिया। लेकिन असली सवाल तब उठता है जब पीड़िता न्याय की उम्मीद लेकर थाने पहुंचती है और वहीं से कथित तौर पर दुत्कार कर लौटा दी जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक ऑडियो में पुलिस और पीड़िता के बीच कथित बातचीत ने मामले को और संदिग्ध बना दिया है।
फुलपरास: हथियारों से लैस भीड़ ने दलित महिला को खंभे से बांधा, साड़ी फाड़ी
पीड़िता 43 वर्षीय ललिता देवी (पति दिनेश साफी), वार्ड 04 ललमनियां की निवासी हैं। उनके अनुसार, 15 मार्च 2026 की दोपहर करीब 3 बजे वह अपने ससुर स्व. मुन्नी साफी की खतियानी जमीन (खाता 328, खेसरा 326, रकवा 4 कट्ठा 2 धुर) पर मजदूरों के साथ फूस का घर बना रही थीं। इसी दौरान गांव के ही कुछ लोग हथियारों-हंसुआ, खंती, लाठी और फरसा-से लैस होकर पहुंचे और हमला कर दिया।
आरोप है कि हमलावरों में अविनाश पंडित, भुवनेश्वर पंडित, ओमप्रकाश पंडित, प्रतिभा कुमारी, अनिता देवी और उर्मिला देवी शामिल थे। इन सभी ने मिलकर महिला के साथ बेरहमी से मारपीट की, जातिसूचक शब्दों (धोबिनिया कहकर) का प्रयोग किया और उसे एक खंभे से बांध दिया। इस दौरान उसकी साड़ी-ब्लाउज फाड़कर उसे सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। शोर मचाने पर आसपास के लोग जुटे, तब जाकर हमलावर फरार हुए और ग्रामीणों ने रस्सी खोलकर महिला को मुक्त कराया।
- घटना की तारीख: 15 मार्च 2026, दोपहर लगभग 3 बजे
- विवाद की जमीन: खाता 328, खेसरा 326, रकवा 4 कट्ठा 2 धुर
- पीड़िता: ललिता देवी, पत्नी दिनेश साफी, वार्ड 04 ललमनियां
- ग्राम कचहरी पहले ही पीड़िता के पक्ष में फैसला दे चुकी है, फिर भी विवाद जारी है
थाने में भी नहीं मिला ललमनियां दलित महिला को न्याय, थानाध्यक्ष पर अमर्यादित व्यवहार के आरोप
घायल अवस्था में परिजन पीड़िता को खुटौना सीएचसी ले गए, जहां उसका इलाज हुआ। इसके बाद पुलिस ने दोनों पक्षों को हिरासत में लिया, लेकिन शाम तक आरोपित पक्ष को छोड़ दिया गया जबकि पीड़िता पक्ष को रोके रखा गया। स्थानीय गणमान्य लोगों के हस्तक्षेप के बाद रात में उन्हें भी छोड़ा गया।
पीड़िता का आरोप है कि अगले दिन जब वह पुनः थाना पहुंची, तो थानाध्यक्ष ने उसे बैठाकर खुद कमरे में चले गए और इसी बीच दूसरे पक्ष के लोग उनसे मिलने पहुंच गए। काफी देर बाद जब महिला ने गुहार लगाई, तो उसके साथ अमर्यादित भाषा का प्रयोग करते हुए डांटकर भगा दिया गया और उसकी प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। उल्टे दूसरे पक्ष के आवेदन पर केस दर्ज कर लिया गया।
इंटरनेट मीडिया पर प्रचारित एक ऑडियो में थानाध्यक्ष की कथित बदजुबानी सामने आई है, जिसमें वे पीड़िता से कहते सुने जा रहे हैं कि “तुम जितनी सुंदर दिखती हो, उससे बेहतर तो मेरे घर में काम करने वाली है।” हालांकि, वायरल ऑडियो की पुष्टि मिथिला मुखबिर नहीं
करता।
थानाध्यक्ष अभिषेक कुमार ने सफाई देते हुए कहा है कि वे अपने पारिवारिक मामले पर बात कर रहे थे, जिसे मुद्दा बनाया जा रहा है। वहीं, डीएसपी अमित कुमार ने पूरे प्रकरण की जांच के बाद ही कुछ कहने की बात कही है। यह घटना अब सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि व्यवस्था की संवेदनहीनता और प्रशासनिक जवाबदेही पर एक बड़ा सवाल बन चुकी है।
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