
Madhubani जिले के खुटौना थाना क्षेत्र में हाल ही में हुई छापेमारी के बाद अवैध गन फैक्ट्री का पर्दाफाश पर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (डीएसपी) सुधीर कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की। इस दौरान उन्होंने छापेमारी से जुड़ी सभी जानकारियां और चौंकाने वाले आंकड़े साझा किए।
डीएसपी सुधीर कुमार ने बताया कि पुलिस को लंबे समय से खुटौना क्षेत्र में अवैध गतिविधियों की सूचना मिल रही थी। गुप्त सूचना के आधार पर खुटौना बाजार और झांझपट्टी गांव में छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में दो मिनी गन फैक्ट्री का भंडाफोड़ हुआ।
अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (डीएसपी) सुधीर कुमार ने प्रेस कांफ्रेंस में बताया कि यह अवैध गन फैक्ट्री राज्य के भीतर और नेपाल के क्षेत्रों में हथियारों की आपूर्ति कर रही थी।यह फैक्ट्री परसाही पश्चिमी के रहने वाले और वर्तमान में खुटौना बाजार के निवासी इस्तियाक आलम, इफ्तिकार आलम, और इम्तियाज आलम द्वारा संचालित की जा रही थी। तीनों स्वर्गीय अब्दुल रहमान के पुत्र हैं।
इस कार्रवाई में पुलिस ने पांच प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया:
- राजकुमार चौधरी उर्फ बिरजू (मुख्य संचालक) – मुंगेर निवासी और अवैध हथियार निर्माण का विशेषज्ञ।
- इस्तियाक आलम – खुटौना निवासी और फैक्ट्री का प्रमुख संचालक।
- इफ्तिकार आलम – खुटौना निवासी।
- इम्तियाज आलम – झांझपट्टी निवासी।
- राजू कुमार साह – झांझपट्टी निवासी, जिसने अपने घर को गन फैक्ट्री में बदल दिया।
Madhubani गन फैक्ट्री :ये रही बरामदगी की सूची
पुलिस ने छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में हथियार और उपकरण बरामद किए। बरामदगी में निम्नलिखित सामग्रियां शामिल हैं:
- 24 अर्धनिर्मित पिस्तौल
- 44 बैरल
- 3 पिस्टल स्लाइडर
- 2 मिलिंग मशीन
- 1 लेथ मशीन
- 3 ड्रिलिंग मशीन
- 2 ग्राइंडर मशीन
- हथियार बनाने की भारी मात्रा में सामग्री
- 2 मोटरसाइकिल और 5 मोबाइल फोन
मशीनरी दुकान ‘रहमान लेथ’ समय के साथ बनी अवैध गन फैक्ट्री
करीब 50 साल पहले, अब्दुल रहमान ने साइकिल पर घूम-घूमकर गांवों में मशीनरी रिपेयरिंग का काम शुरू किया था। अपनी मेहनत और लगन से उन्होंने खुटौना बाजार में जमीन खरीदी और ‘रहमान लेथ’ नाम से एक मशीनरी दुकान खोली। यह दुकान इलाके में मशीनों की मरम्मत और निर्माण के लिए प्रसिद्ध थी।
समय के साथ, यह प्रतिष्ठित दुकान एक अवैध मिनी गन फैक्ट्री में तब्दील हो गई। यहां से बनने वाले हथियारों को मुंगेर के कुख्यात अपराधी राजकुमार चौधरी उर्फ बिरजू चौधरी के जरिए पूरे राज्य और नेपाल तक सप्लाई किया जाता था। राजकुमार चौधरी, जो अवैध हथियार निर्माण और तस्करी का विशेषज्ञ माना जाता है, इस नेटवर्क का प्रमुख संचालक था।
इस गन निर्माण नेटवर्क का दूसरा ठिकाना झांझपट्टी गांव में मिला। यहां तुलानंद साह के पुत्र राजू कुमार साह ने अपने घर में गन फैक्ट्री खोल रखी थी। राजू जो पेशे से पिकअप वाहन चालक है, राजकुमार चौधरी और आलम भाइयों के संपर्क में आया और इस अवैध कारोबार का हिस्सा बन गया।
चौंकाने वाली बात यह है कि यह अवैध कारोबार लंबे समय से चल रहा था, लेकिन स्थानीय प्रशासन और जनता को इसकी भनक तक नहीं लगी। ‘रहमान लेथ’ का उपयोग खुलेआम पुलिस वाहनों की मरम्मत के लिए होता था, जिससे किसी को भी शक नहीं हुआ।