
AI चित्रांकन
मधुबनी: लौकहा थाना क्षेत्र में एनएच-227 पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के बाद इलाके में दहशत और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। स्थानीय व्यापारियों और ईंट भट्ठा संचालकों ने मधुबनी पुलिस पर अवैध वसूली, डराने-धमकाने और फर्जी मामले में फंसाने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद से लोग भयभीत हैं और पुलिस की भूमिका को लेकर खुलकर सवाल उठाए जा रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस कार्रवाई ने आम लोगों के भरोसे को झकझोर दिया है।
व्यापारियों के अनुसार, मंगलवार रात आशिर्वाद ईंट भट्ठा पर आग प्रज्वलन कार्यक्रम आयोजित था जिसमें दूर-दराज से लोग पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद लोग भोजन कर अपने-अपने घर लौट रहे थे। इसी दौरान मधुबनी पुलिस ने गश्ती के नाम पर बिना नंबर प्लेट की एक वाहन से रास्ता रोका और सर्विस रिवॉल्वर दिखाकर डराने का आरोप लगाया गया। व्यापारियों का दावा है कि पुलिस ने अवैध वसूली का दबाव बनाया और विरोध करने पर फर्जी केस में फंसाने की धमकी दी गई। मौके से मजदूरों समेत दो लोगों को जबरन थाने ले जाया गया, हालांकि बाद में मजदूरों को छोड़ दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान एनएच-227 पर देर रात तक तनाव की स्थिति बनी रही। लोग सड़कों पर जमा रहे और तरह-तरह की चर्चाएं होती रहीं। क्षेत्र में पुलिस बल की मौजूदगी बढ़ा दी गई लेकिन हालात पूरी तरह सामान्य होने में समय लगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की घटनाओं से इलाके में भय का वातावरण बन गया है और रातभर लोग सहमे रहे।
मधुबनी पुलिस अपने कारवाई को ठहरा रही है जायज, गांजा तस्करी के इनपुट पर कर रही थी रूटीन चेकअप
वहीं दूसरी ओर मधुबनी पुलिस ने अपनी कार्रवाई को जायज ठहराते हुए मुठभेड़ जैसी स्थिति, फायरिंग और हथियार बरामदगी का दावा किया है। लौकहा थाना में पदस्थापित पु.नि. सह थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार के अनुसार, 16 दिसंबर की रात सूचना मिली थी कि चन्नीपुर मार्ग से काले रंग के वाहन द्वारा गांजा तस्करी की जा सकती है। इसके बाद धौकड़ा नदी पुल के पास एनएच-227 पर निगरानी की गई। पुलिस का कहना है कि संदिग्ध वाहन को रोकने के दौरान भीड़ जमा हो गई और इसी बीच एक व्यक्ति ने कट्टा निकालकर दो राउंड फायरिंग की।
मधुबनी पुलिस के मुताबिक स्थिति बिगड़ने पर अतिरिक्त बल बुलाया गया जिसके बाद कुछ लोग वाहन लेकर फरार हो गए। मौके से राहुल कुमार और नथुनी सिंह को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने दावा किया है कि एक काले रंग की जिमनी से 315 बोर का जिंदा कारतूस बरामद किया गया, जबकि एक बलेनो कार को भी जब्त किया गया है। हालांकि व्यापारियों ने इन दावों पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि फायरिंग हुई थी तो घटनास्थल से खोखा क्यों नहीं मिला और यदि कारतूस बरामद हुआ तो उसकी वीडियोग्राफी मौके पर क्यों नहीं कराई गई।
पुलिस और व्यापारियों के बयानों में सामने आए विरोधाभास के बाद मामला और उलझ गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मधुबनी पुलिस की कार्रवाई की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। लोगों की मांग है कि जांच में दोनों पक्षों के आरोपों की गंभीरता से पड़ताल की जाए जिससे इलाके में फैले डर और भ्रम को दूर किया जा सके।


