महेंद्र मलंगिया, मैथिली साहित्य के जाने-माने नाटककार और रंगकर्मी को साहित्य अकादमी पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया जाएगा। यह प्रतिष्ठित पुरस्कार उन्हें उनकी पुस्तक "प्रबंध संग्रह" के लिए दिया जा रहा है। इस पुस्तक में 19 आलेखों का संग्रह है, जो प्रबंध, निबंध, और शोध जैसे विषयों को सरलता और गहराई से प्रस्तुत करते हैं। साहित्य अकादमी, नई दिल्ली द्वारा इस पुरस्कार की घोषणा की गई है।महेंद्र मलंगिया के सफ़र के बारे में जानिए,मधुबनी के हैं निवासी
महेंद्र मलंगिया का जन्म 20 जनवरी 1946 को मधुबनी जिले के मलंगिया गांव में हुआ। बचपन से ही उनकी रुचि साहित्य और नाटकों की ओर रही। उन्होंने मैथिली, हिंदी, अंग्रेजी और नेपाली भाषाओं में गहरी विशेषज्ञता हासिल की।

महेंद्र मलंगिया ने अपने करियर की शुरुआत नेपाल के जनकपुर में एक स्कूल में शिक्षण कार्य से की। हालांकि, सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने पूरा जीवन मैथिली नाटक और रंगकर्म के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया। उनका मानना था कि मैथिली भाषा और संस्कृति को वैश्विक मंच पर पहचान दिलाना जरूरी है।
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Posted by Sahitya Tak on Wednesday 18 December 2024
उन्होंने मैथिली साहित्य में 13 नाटक, 19 एकांकी, 14 नुक्कड़ नाटक और 10 रेडियो नाटक प्रकाशित किए। उनकी लेखनी ने मैथिली साहित्य को नई दिशा और पहचान दी।
प्रबंध संग्रह जिनके लिए होंगे सम्मानित
महेंद्र मलंगिया की पुस्तक “प्रबंध संग्रह” मैथिली साहित्य में एक मील का पत्थर है। इस पुस्तक में 19 आलेख शामिल हैं, जो प्रबंध और शोध के गहन विषयों को स्पष्ट और सरल तरीके से समझाते हैं। यह पुस्तक उनके साहित्यिक ज्ञान और लेखन कौशल का परिचायक है, जिसे साहित्य जगत में काफी सराहा गया।
सम्मान और उपलब्धियां
महेंद्र मलंगिया को उनके योगदान के लिए कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है। इनमें सीनियर फेलोशिप (भारत सरकार) और इंटरनेशनल थिएटर इंस्टीट्यूट (नेपाल) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान शामिल हैं।
नेपाल में उन्हें एक दर्जन से अधिक पुरस्कार प्राप्त हुए। उनके चर्चित नाटकों में “ओकरा आंगनक बारहमासा,” “जुआयल कनकनी,” “राजा सलहेस,” “लक्ष्मण रेखा खंडित” और “काठक लोक” शामिल हैं। इन नाटकों ने मैथिली नाट्य कला को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है।
मैथिली रंगमंच को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने मिथिला नाटक कला परिषद की स्थापना की। यह संस्था मैथिली नाटकों की एक प्रयोगशाला है, जहां नई प्रतिभाओं को निखारा जाता है। उनकी यह पहल मैथिली संस्कृति के प्रचार-प्रसार में मील का पत्थर साबित हुई।
वर्तमान में, महेंद्र मलंगिया मैथिली के पहले गद्यकार ज्योतिरीश्वर की कृति “वर्णरत्नाकर” पर शोध कर रहे हैं। यह शोध मैथिली साहित्य के इतिहास को और अधिक समृद्ध करेगा।
महेंद्र मलंगिया के साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित होने की खबर ने मधुबनी जिले में खुशी का माहौल बना दिया है। उनके प्रशंसक और मैथिली साहित्य प्रेमी इस उपलब्धि को मैथिली भाषा के लिए गर्व का क्षण मानते हैं।