
Mithila Painting:एनआइटी पटना की छात्राएं अब मिथिला पेंटिंग की बारीकी सीखने के लिए एक अनूठे मंच पर आई हैं। भारत श्रेष्ठ भारत अभियान के अंतर्गत आयोजित इस विशेष कार्यशाला में, 1 फरवरी से 23 फरवरी तक, पारंपरिक मिथिला कला के विभिन्न पहलुओं को उजागर किया जा रहा है। मां प्रेमा फाउंडेशन और एसबीआई के सहयोग से आयोजित इस वर्कशॉप का उद्देश्य छात्राओं में कला के प्रति रुचि बढ़ाना और उन्हें आधुनिक तकनीकों के साथ-साथ पारंपरिक शैलियों से भी परिचित कराना है।
NIT Patna छात्राओं के लिए आयोजित कर रहा है Mithila Painting का वर्कशॉप
इस कार्यशाला का एक महत्वपूर्ण आकर्षण पद्मश्री से सम्मानित मिथिला पेंटिंग की अग्रणी दुलारी देवी हैं, जो वर्चुअल माध्यम से छात्राओं को मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। उनके साथ ही, संस्थान में ही नेशनल और राज्य स्तरीय अवार्ड प्राप्त कलाकारों द्वारा प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे छात्राएं अपनी रचनात्मक क्षमताओं को और निखार सकें।
संस्थान के निदेशक प्रो पीके जैन के नेतृत्व में कुल 70 छात्राएं इस कार्यक्रम का हिस्सा बन चुकी हैं। प्रशिक्षण प्रभारी डॉ. शैलेश मणि पांडेय ने बताया कि कार्यशाला के दौरान छात्राओं को विभिन्न पेंटिंग तकनीकों का व्यावहारिक ज्ञान दिया जाएगा, जिससे वे न केवल पारंपरिक मिथिला पेंटिंग के मूल सिद्धांतों को समझेंगी, बल्कि उसमें अपनी कल्पनाशीलता का भी समावेश कर सकेंगी। डॉ. पांडेय ने यह घोषणा की कि 16 फरवरी को पद्मश्री दुलारी देवी स्वयं भी इस वर्कशॉप में शामिल होंगी, जो छात्राओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी।यह कार्यक्रम एनआइटी पटना द्वारा न केवल शैक्षणिक गतिविधियों में नवीनता लाने का प्रयास है, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक धरोहर से छात्राओं को जोड़ने का भी एक महत्वपूर्ण कदम है। मिथिला पेंटिंग, जो सदियों से भारतीय कला का अभिन्न अंग रही है, को इस कार्यशाला के माध्यम से छात्रों में फिर से जीवंत किया जा रहा है। इस कार्यक्रम से छात्राओं को न केवल तकनीकी जानकारी मिलेगी, बल्कि वे अपने अंदर छिपी रचनात्मकता और कलात्मक दृष्टिकोण को भी विकसित कर पाएंगी।

भारतीय कला और संस्कृति की इस पुनर्जीवन यात्रा के तहत, एनआइटी पटना की छात्राओं को आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ पारंपरिक कलाओं का भी अनुभव मिलेगा। यह वर्कशॉप भविष्य में अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी एक प्रेरणास्पद मॉडल बन सकती है।