मधुबनी जिले के विभिन्न प्रखंडों में नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने के बाद जिले के 14 पंचायतों में पैक्स अध्यक्ष पद पर निर्विरोध चुनाव हुए। यह चुनाव जिले के खजौली, जयनगर,झंझारपुर,लखनौर,पंडौल,फुलपरास और बाबुबरही प्रखंड क्षेत्रों में संपन्न हुए।इन निर्विरोध चुनावों ने न केवल पंचायतों में आपसी सहमति के साथ साथ यह भी दिखाया कि पंचायत स्तर पर सामंजस्य और नेतृत्व के प्रति जनता का भरोसा कितना मजबूत है।खजौली प्रखंड के पांच पंचायतों में निर्विरोध निर्वाचन

और बाबूबरही के पिरही पंचायत पैक्स अध्यक्ष रणधीर खन्ना [दाएं]।
खजौली प्रखंड में निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति सबसे अधिक देखी गई, जहां पाँच पंचायतों में बिना किसी विरोध के अध्यक्ष चुने गए।
- सियाशरण कुमार को खजौली पंचायत से निर्विरोध चुना गया।
- सुक्की पंचायत में रामबाबू सिंह,
- कन्हौली पंचायत में नवीन सिंह,
- दतुआर पंचायत में अमरेंद्र सिंह,
- और महुआ एगडारा पंचायत से सुशीला देवी को निर्विरोध पैक्स अध्यक्ष चुना गया।
इन पंचायतों में लोगों ने अपने नेतृत्व के चयन को लेकर व्यापक सहमति बनाई और चुनावी प्रतिस्पर्धा की जरूरत ही नहीं पड़ी।
जयनगर प्रखंड में महिला नेतृत्व का उदय
जयनगर प्रखंड के बेलही पूर्वी पंचायत से विमला देवी और बेलही दक्षिणी पंचायत से उपेन्द्र यादव निर्विरोध पैक्स अध्यक्ष बने। विमला देवी का निर्वाचन इस बात का संकेत है कि पंचायत स्तर पर महिलाओं की भागीदारी बढ़ रही है और जनता उन्हें नेतृत्व के लिए उपयुक्त मान रही है।
झंझारपुर और फुलपरास प्रखंड में पुराने और नए चेहरों का मेल
झंझारपुर प्रखंड के बलनीमेहथ पंचायत से राजकुमार ठाकुर और भगवतीपुर पंचायत से अनिल झा निर्विरोध चुने गए।
फुलपरास प्रखंड में कालापट्टी पंचायत से निवर्तमान अध्यक्ष पप्पू चाँढ को जनता ने फिर से निर्विरोध चुना। यह दिखाता है कि उनके पिछले कार्यकाल में किए गए कार्यों से जनता संतुष्ट है
पंडौल और बाबुबरही प्रखंड में नई उम्मीदें
पंडौल प्रखंड के भगवतीपुर पंचायत से प्रमोद कुमार रावत और संकोर्थ पंचायत से बेचन यादव निर्विरोध अध्यक्ष बने।
बाबुबरही प्रखंड के पिरही पंचायत से रणधीर खन्ना निर्विरोध चुने गए। यह निर्वाचन पंचायतों में नेतृत्व और विकास कार्यों के प्रति जनता के विश्वास को दर्शाता है।
लखनौर प्रखंड में भरोसेमंद नेतृत्व की पुनरावृत्ति
लखनौर प्रखंड के तमुरिया पंचायत से निवर्तमान अध्यक्ष मो. तैयब अली को पुनः निर्विरोध चुना गया। यह साबित करता है कि जनता उनके नेतृत्व को विश्वसनीय मानती है और उनके द्वारा किए गए विकास कार्यों को सराहती है।
निर्विरोध चुने गए अध्यक्षों की जिम्मेदारियाँ
निर्विरोध चुने गए अध्यक्षों के लिए यह जिम्मेदारी बढ़ जाती है कि वे जनता की उम्मीदों पर खरे उतरें। इनके सामने पंचायत के बुनियादी विकास, सरकारी योजनाओं के कुशल क्रियान्वयन और समाज में समरसता बनाए रखने का दायित्व होगा।
जनता ने निर्विरोध निर्वाचन प्रक्रिया को सकारात्मक तरीके से स्वीकार किया है। यह प्रक्रिया पंचायत स्तर पर एकजुटता और लोकतांत्रिक सहमति का उदाहरण प्रस्तुत करती है। निर्वाचित प्रतिनिधियों ने भी जनता को धन्यवाद देते हुए यह वादा किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ निभाएंगे।