
Patna scientists water filter eggshell Patna News: पटना के वैज्ञानिकों ने कचरे में फेंके जाने वाले अंडे के छिलकों से एक ऐसा सस्ता वाटर फिल्टर विकसित किया है जो पानी में घुले आर्सेनिक, लेड और फ्लोराइड जैसे जानलेवा तत्वों को चुंबक की तरह सोख लेता है। इस देसी तकनीक को अब भारत सरकार ने पेटेंट भी दे दिया है।
Patna scientists water filter eggshell: 7 साल की मेहनत, अब मिली बड़ी कामयाबी
आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (AKU) के स्कूल ऑफ नैनोसाइंस एवं नैनोटेक्नोलॉजी की टीम ने यह कमाल कर दिखाया है। डॉ. राकेश कुमार सिंह, डॉ. अभय कुमार अमन और शोधकर्ता आशुतोष कुमार ने 2016 में इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया था। सात साल की निरंतर मेहनत के बाद 2023 में उन्हें सफलता मिली। इस Patna scientists water filter eggshell मामले में जो अपडेट सामने आया है, वह यही है।
वैज्ञानिकों ने बेकार समझे जाने वाले अंडे के छिलकों को प्रोसेस कर उन्हें ‘कैल्शियम ऑक्साइड नैनो पार्टिकल्स’ में बदल दिया। इन सूक्ष्म कणों में जहरीले तत्वों को सोखने की जो क्षमता पाई गई, वह महंगे फिल्टरों को भी मात देती है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
प्रदूषित पानी में जब इन नैनो पार्टिकल्स को डाला जाता है तो ये आर्सेनिक, लेड और फ्लोराइड को बेहद तेजी से सोख लेते हैं। साथ ही डायरिया फैलाने वाले बैक्टीरिया और अन्य विषाणुओं को भी नष्ट कर देते हैं।
मनेर और उत्तर बिहार के उन इलाकों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है जहां दूषित पानी पीने से लोग कैंसर और हड्डियों की बीमारियों का शिकार हो रहे हैं।
गरीबों के लिए असली गेम-चेंजर
बिहार के कई जिलों में आर्सेनिक की मात्रा सामान्य से कहीं ज्यादा है और सबसे ज्यादा मार गरीब तबके पर पड़ती है। महंगे वाटर फिल्टर हर किसी की पहुंच में नहीं होते। ऐसे में अंडे के छिलके से बनी यह तकनीक ग्रामीण और गरीब आबादी के लिए बेहद किफायती विकल्प बन सकती है।
यह तकनीक केवल बिहार तक सीमित नहीं रहेगी।
राजस्थान और झारखंड जैसे राज्यों में भी जहां फ्लोराइड की गंभीर समस्या है, यह तकनीक कारगर साबित हो सकती है।
पेटेंट मिला, अब बाजार में उतारने की तैयारी
भारत सरकार ने इस देसी तकनीक को पेटेंट की मुहर लगा दी है, जिससे इसकी विश्वसनीयता और उपयोगिता दोनों साबित होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह शोध केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहेगा। अब इसे बड़े पैमाने पर बाजार में उतारने की तैयारी चल रही है, ताकि दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों को शुद्ध पानी मिल सके।
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