फुलपरास विधानसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी विजय यादव ने शराबबंदी पर सवाल खड़े करते हुए इसे बिहार की बदहाली का मुख्य कारण बताया। विजय यादव जो दुर्गा माता मंदिर सेवा ट्रस्ट रामनगर के संस्थापक अध्यक्ष भी हैं, ने अपने बयान में शराबबंदी के प्रभावों पर चर्चा करते हुए इसे एक मजाक बताया। उन्होंने कहा कि अप्रैल 2016 में लागू की गई यह नीति वर्तमान में राज्य को हर साल लगभग 20,000 करोड़ रुपये के राजस्व से वंचित कर रही है।विजय यादव ने कहा कि बिहार जैसे गरीब राज्य के लिए इस राजस्व का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने में किया जा सकता था। लेकिन इसके विपरीत, शराबबंदी के बाद 20,000 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध कारोबार पैदा हो गया है। उन्होंने इसे राज्य में कानून-व्यवस्था और आर्थिक विकास के लिए एक बड़ी चुनौती बताया।
अवैध कारोबार और बढ़ते अपराध
शराबबंदी के बाद बिहार में अवैध शराब कारोबार और ड्रग्स का उपयोग तेजी से बढ़ा है। विजय यादव ने कहा कि यह नीति गरीबों के लिए परेशानी और दबंगों के लिए कमाई का जरिया बन गई है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शराबबंदी के बाद राज्य में संज्ञेय अपराधों और सड़क दुर्घटनाओं में वृद्धि हुई है।
पटना उच्च न्यायालय की टिप्पणी
पटना उच्च न्यायालय ने भी शराबबंदी पर कठोर टिप्पणी करते हुए इसे तस्करी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला कदम बताया। अदालत ने इसे गरीबों के लिए जहरीली शराब का खतरा और दबंगों के लिए मुनाफे का जरिया करार दिया। विजय यादव ने कहा कि यह टिप्पणी नीति के असफल होने का स्पष्ट संकेत है।
राजनीतिक सवाल और विपक्ष का आरोप
विजय यादव ने विपक्षी पार्टियों और सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एक समय बीजेपी, जो विपक्ष में रहते हुए नीतीश कुमार पर शराब माफियाओं के साथ मिलीभगत का आरोप लगाती थी, अब सत्ता में साझेदारी कर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि बिहार जैसे राज्य में शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए उचित उपाय क्यों नहीं किए गए।
क्या शराबबंदी पर पुनर्विचार जरूरी है?
विजय यादव ने इस बात पर जोर दिया कि शराबबंदी के नियमों को सख्ती से लागू करने के बजाय इसे व्यावहारिक और न्यायसंगत बनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर इस नीति को सही दिशा में लागू किया जाता, तो यह राज्य के विकास में सहायक हो सकती थी।