
सोनपुर: इस साल लग रहे Sonpur Mela 2025 में घूमने आए लोगों को सबसे पहले जिस चीज़ ने रोक लिया, वह था एक विशालकाय जाफराबादी भैंसा ‘प्रधान बाबू’। मेला भले ही अब ज्यादातर झूलों, कपड़ों और फूड स्टॉल की चमक से भरा रहता है, लेकिन ‘प्रधान बाबू’ की उपस्थिति ने एक बार फिर इस ऐतिहासिक मेले को उसकी पुरानी पहचान की तरफ मोड़ दिया है। जैसे ही लोग इसके पास लगे बोर्ड पर “1 करोड़ रुपये” की कीमत देखते हैं, भीड़ खुद-ब-खुद जमा होने लगती है।
मेले में घूमते लोगों में उत्सुकता ऐसी कि कोई इसका वीडियो बना रहा है, कोई सेल्फी, और कुछ लोग सिर्फ इसकी लंबाई-चौड़ाई देखकर ही दंग रह जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी यह भैंसा लगातार ट्रेंड कर रहा है, जिससे Sonpur Mela 2025 को एक नई तरह की चर्चा मिल गई है।
बिहार पर्यटन विभाग – सोनपुर मेला जानकारी
शुरुआत से हीSonpur Mela 2025 का चेहरा बना ‘प्रधान बाबू’
मालिक बीरबल कुमार सिंह, जो रोहतास जिले से आए हैं, बताते हैं कि यह भैंसा सिर्फ 38 महीने का है लेकिन इसका शरीर 8 फीट लंबा और लगभग 5 फीट ऊंचा है। चमकदार काला रंग और बेहद संतुलित बॉडी स्ट्रक्चर इसके लुक को और भी दमदार बनाता है। बीरबल कहते हैं कि इसकी डाइट पर प्रतिदिन करीब 2,000 रुपये खर्च होते हैं और इसे खास ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे इसका शरीर हमेशा प्रभावशाली दिखता है।
लोगों का रिएक्शन इतना दिलचस्प है कि कई दर्शक इसे देखकर कहते हैं, “ऐसा भैंसा हमने कभी नहीं देखा।” कुछ तो इसे मेले का “शो स्टॉपर” कहने लगे हैं।
भारत पशुपालन विभाग – जाफराबादी नस्ल
कीमत पूछने वालों की लाइन लंबी, खरीदार अभी नहीं
हालांकि इस भैंसे की कीमत 1 करोड़ बताई गई है, लेकिन अभी तक कोई पक्का खरीदार सामने नहीं आया है। हां, फोन पर पूछताछ करने वालों की संख्या जरूर बढ़ी है। कई लोग सिर्फ इसे देखने आते हैं क्योंकि इसकी नस्ल, कद-काठी और प्रभावशाली रूप पहली ही नजर में आकर्षित कर लेते हैं।
कुछ लोग मज़ाक में कहते हैं, “भैंसा कम, सेलिब्रिटी ज्यादा लगता है।”
सोनपुर मेले की खोती हुई पहचान को संभाले हुए ‘प्रधान बाबू’
एक समय था जब सोनपुर मेला एशिया का सबसे बड़ा पशु बाजार माना जाता था। घोड़े, ऊंट, हाथी, बैल — सबकी खरीद-बिक्री यहां होती थी। नए नियम-कानून और समय के साथ यह परंपरा कम होती गई और मेला मनोरंजन का केंद्र बन गया।
लेकिन इस साल ‘प्रधान बाबू’ ने उस परंपरा की झलक फिर से दिखा दी है। बहुत से पशुपालक यह देखकर खुश हैं कि लोग अभी भी पशुओं में दिलचस्पी रखते हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि अगर ऐसे आकर्षण बढ़े, तो आने वाले वर्षों में Sonpur Mela 2025 जैसी आयोजन फिर पुराने गौरव को हासिल कर सकते हैं।


