
सम्राट चौधरी अंग्रेजी विवाद: बिहार के नवनियुक्त मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी इन दिनों सोशल मीडिया पर एक अलग वजह से चर्चा में हैं। उनके कुछ वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हुए, जिनमें वह अंग्रेजी बोलते दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने उनके अंग्रेजी उच्चारण को लेकर मीम्स बनाए और मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। देखते ही देखते यह मामला राजनीतिक बहस में बदल गया।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर चल रही इस ट्रोलिंग को लेकर अब बीजेपी नेताओं ने खुलकर प्रतिक्रिया देनी शुरू कर दी है। पार्टी नेताओं का कहना है कि किसी नेता की योग्यता को उसकी अंग्रेजी बोलने की क्षमता से जोड़ना गलत सोच को दिखाता है। बीजेपी नेताओं ने इसे भारतीय भाषाओं और भारतीय सोच के खिलाफ मानसिकता बताया है।
सम्राट चौधरी अंग्रेजी विवाद पर उमा भारती का बड़ा बयान
इस पूरे विवाद में बीजेपी की वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही ट्रोलिंग की तीखी आलोचना की और ट्रोलर्स को कड़े शब्दों में जवाब दिया।
उमा भारती ने अपने बयान में कहा कि किसी व्यक्ति का मजाक सिर्फ इसलिए उड़ाना कि वह अंग्रेजी ठीक तरह से नहीं बोल पाता, गलत मानसिकता को दिखाता है। उन्होंने कहा कि यह सोच अभी भी अंग्रेजों की मानसिक गुलामी से बाहर नहीं निकल पाई है।
उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का अंग्रेजी उच्चारण को लेकर मजाक उड़ाने वाले लोग हीन भावना से ग्रसित हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई बड़े और शक्तिशाली नेता अंग्रेजी नहीं बोलते, फिर भी उनका प्रभाव पूरी दुनिया में दिखाई देता है।
उमा भारती ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का उदाहरण देते हुए कहा कि ये दोनों नेता अंग्रेजी भाषा का उपयोग नहीं करते, लेकिन दुनिया के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाते हैं। उन्होंने कहा कि किसी नेता की क्षमता का आकलन भाषा के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पर बढ़ी राजनीतिक बहस
सम्राट चौधरी के वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंटा दिखाई दे रहा है। कुछ लोग ट्रोलिंग को गलत बता रहे हैं और कह रहे हैं कि जनता को नेता के काम पर ध्यान देना चाहिए, जबकि कुछ लोग वीडियो को लेकर लगातार टिप्पणी कर रहे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह विवाद अब सिर्फ भाषा तक सीमित नहीं रह गया है। यह मामला भारतीय भाषाओं, शिक्षा व्यवस्था और राजनीति में अंग्रेजी के प्रभाव पर भी बहस का कारण बन गया है। कई लोगों ने कहा कि देश में बड़ी संख्या में ऐसे नेता हैं जो स्थानीय भाषाओं में ज्यादा सहज महसूस करते हैं और जनता से सीधे संवाद करते हैं।
बीजेपी नेताओं का कहना है कि किसी मुख्यमंत्री या जनप्रतिनिधि की पहचान उसके काम और जनता के बीच उसकी पकड़ से होती है, न कि अंग्रेजी बोलने के तरीके से। पार्टी के कई समर्थकों ने भी सोशल media पर सम्राट चौधरी के समर्थन में पोस्ट साझा किए हैं।
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